बेड़वास की भावना का दुखद अंत: जिस हाथ की मेहंदी भी नहीं छूटी थी, उसी पर मिले जुल्म के निशान

 

उदयपुर। नियति का क्रूर खेल देखिए, एक पिता ने अपनी लाडली को बड़े अरमानों के साथ 13 महीने पहले विदा किया था, पर उसे क्या पता था कि जिस चौखट पर उसकी डोली उतरी है, वहां से उसकी अर्थी इतनी जल्दी और इतनी खौफनाक परिस्थितियों में उठेगी। उदयपुर के बेड़वास में 19 साल की भावना कुंवर की संदिग्ध मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि रिश्तों की पवित्रता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार को प्रतापनगर थाने के बाहर का नजारा रूह कंपा देने वाला था। वहां खड़ी सिसकती मां और इंसाफ की गुहार लगाती महिलाओं की आंखों में गम कम और गुस्सा ज्यादा था। परिजनों का आरोप है कि जिस पति को भावना ने अपना सर्वस्व माना, उसी ने उसकी जिंदगी को नर्क बना दिया था। भाई अर्जुन सिंह की भर्राई आवाज ने बताया कि भावना ने सिर्फ अपने पति के मोबाइल में किसी दूसरी युवती की चैट देखने की ‘खता’ की थी। बस, इसी बात ने उसके सुहाग को हैवान बना दिया।

भावना के चाचा लालसिंह ने रुंधे गले से बताया, “जब हम अस्पताल पहुंचे, तो हमारी फूल जैसी बच्ची बेसुध पड़ी थी। उसके गले और हाथ-पांव पर नीले पड़े निशान चिल्ला-चिल्लाकर उस पर हुए जुल्म की दास्तां बयां कर रहे थे।” आरोप है कि पति हेमेन्द्र सिंह ने न केवल उसे शारीरिक तौर पर तोड़ा, बल्कि उसे अपनों से बात करने तक के लिए तरसा दिया था।

पुलिस की शुरुआती बेरुखी ने पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया। राजपूत समाज की महिलाओं और पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत के नेतृत्व में जब दो घंटे तक थाने का घेराव हुआ, तब कहीं जाकर खाकी जागी और एफआईआर दर्ज की गई। अब सवाल यह है कि क्या भावना को न्याय मिलेगा? क्या समाज की वो बेटियां सुरक्षित रह पाएंगी जो अपनों के ही घर में अपनों के हाथों टॉर्चर हो रही हैं? फिलहाल, भावना के मायके मंदेरिया गांव में सन्नाटा पसरा है, जहाँ हर आंख सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही है— आखिर उस मासूम का कसूर क्या था?

 

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