हिंदुस्तान जिंक की बड़ी उपलब्धि : विगत 6 वर्षों में लगाए 8.55 लाख से अधिक पौधे, जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली की ओर मजबूत कदम

वित्त वर्ष 2026 में ही 1.13 लाख से ज्यादा पौधरोपण; चंदेरिया, जावर और कायड़ में माइकोराइजा व मियावाकी तकनीक से विकसित किए जा रहे सघन देशी वन

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक तथा शीर्ष 10 चांदी उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। कंपनी ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक अपने परिचालन क्षेत्रों में 8.55 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं।

राजस्थान और उत्तराखंड में वैज्ञानिक वनीकरण, प्राकृतिक आवासों की बहाली और मियावाकी जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कंपनी लगातार पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ कर रही है। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही 1,13,500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव”: अरुण मिश्रा (सीईओ)
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपने विचार साझा करते हुए हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा-जिम्मेदार खनन केवल बेहतर औद्योगिक संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण तैयार करने से जुड़ा है। हमारा हर अभियान औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विभिन्न इकाइयों में अपनाई जा रही हैं आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकें

हिंदुस्तान जिंक ने अपने अलग-अलग संयंत्रों और खदान क्षेत्रों में स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल अनूठी पहलें की हैं-चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर: ‘माइकोराइजा तकनीक’ का उपयोग कर 22.25 हेक्टेयर जारोफिक्स यार्ड का सफलतापूर्वक पुनर्स्थापन किया गया है तथा भविष्य में 250 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक वन विकसित करने का लक्ष्य है।

ग्रीन जावर पहल: जावर माइंस समूह द्वारा रावा गांव में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाकर स्थानीय समुदाय को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ा गया है।

मियावाकी तकनीक (राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी व कायड़): सघन और तेजी से बढ़ने वाले देशी वनों का विकास किया जा रहा है, जो कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) में बेहद असरदार हैं।

रामपुरा आगुचा माइंस: देशी प्रजातियों के पौधों के संरक्षण और भविष्य के वृक्षारोपण अभियानों के लिए विशेष पौध नर्सरी तैयार की गई है।

IUCN के सहयोग से नो नेट लॉस ऑफ बायोडायवर्सिटी का लक्ष्य

कंपनी ने इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के सहयोग से अपने ‘बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान’ को अद्यतन किया है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य “No Net Loss of Biodiversity” हासिल करना है, जिससे औद्योगिक विस्तार के बावजूद प्राकृतिक संतुलन पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

उल्लेखनीय है कि वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक, ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स’ (ICMM) से जुड़ने वाली भारत की पहली धातु एवं खनन कंपनी है, जो अपने परिचालन और सप्लायर नेटवर्क में प्रकृति-सकारात्मक (Nature-Positive) दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है।

 

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