प्रतिदिन हो रहे विविध आयोजन
उदयपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूजीसी महिला अध्ययन केंद्र मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय “मंडला उत्सव” एक साप्ताहिक कार्यक्रम (2-8 मार्च 2024) का आयोजन कर रहा है। इसमें लोगो डिजाइनिंग, पेंटिंग प्रतियोगिता, मूवी स्क्रीनिंग, नुक्कड़ नाटक श्सोचश्, स्वास्थ्य जांच और रक्तदान शिविर, वाद-विवाद, क्विज, एक्सटेम्पोर, गेम्स, ओपन माइक, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान, यौन उत्पीड़न की रोकथाम पर कार्यशाला जैसी कई गतिविधियां शामिल हैं।
इसी शृंखला में 4 मार्च को फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के तत्वावधान में स्वास्थ्य जांच शिविर और सेवा, उदयपुर रोटरी क्लब, मेवाड़, उदयपुर के सहयोग से रक्तदान शिविर विश्वविद्यालय के एमडीएस गर्ल्स हॉस्टल में आयोजित किया गया। इसमें एएसजी आई हॉस्पिटल की देखरेख में आंख, डॉ. सौरभ की देखरेख में डेंटल और डॉ. मनीषा स्त्री-रोग विशेषज्ञ जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल की देखरेख में जांच, और सुधा हॉस्पिटल द्वारा बायो केमिकल टेस्ट और ब्लड चेकअप, कलर ब्लाइंनेस और बीएमआई की जाँच कराई। इसमें छात्र- छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। शिविर में 60 लोगों ने पहली बार रक्तदान किया और 70 बालिकाओं और महिलाओं ने रक्त दान किया। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालनन छात्रावास की छात्राओं पायल, शिवंगी, निशा, भूमिका, मोनिका, अनुष्का
आदि ने सरलतापूर्वक किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आर्ट्स कॉलेज के डीन प्रोफेसर हेमन्त दिवेदी, एसोसिएट डीन प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर, रविंद्र सिंह पाल (जिनके नाम 100 बार से ज्यादा रक्तदान का रिकॉर्ड है) डॉ. श्रद्धा गट्टानी, रोटरी क्लब मेवाड़ एवं सेवा उदयपुर के अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे। अतिथियों ने केंद्र के इस प्रयास को सराहा और कहा कि पहली बार देख रहे हैं कि कन्या छात्रावास में रक्तदान शिविर का आयोजन हो रहा है और सारा संचालन सिर्फ बालिकाएँ कर रही है और सुचारू रूप से संपन्न हुआ। महिला दिवस पर स्त्री द्वारा सशक्तिकरण को दर्शाने का और क्या बेहतर तरीका हो सकता है।
मण्डला उत्सव के तीसरे दिन का समापन छात्राओं द्वारा लैंगिक असमानता पर आधारित नुक्कड़ नाटक “सोच” के मंचन के साथ किया गया। महिला अध्ययन केंद्र एवं मौलिक के तत्वावधान में जातिन भरवानी के निर्देशन में एक माह की कार्यशाला के उपरांत इस नुक्कड़ नाटक का मंचन शहर के तमाम स्थानों पर किया जा रहा है। इसका शुभारंभ फतह सागर पाल से किया गया। “सोच” नारी के जीवन, स्टीरियोटाइप, लैंगिक भेदभाव, छेड़छाड़, कन्या भू्रणहत्या जैसे तमाम कुरीतियाँ और समानताओं पर सवाल खड़ा करता है और उसका जवाब भी अंत में बताया है। कुंठित मानसिकता और पितृसत्ता का जहर समानता और समान अवसर प्राप्त होने से हो सकता है। इस नुक्कड़ नाटक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की छात्राएं तमन्ना, मीरा, निष्ठा, मिली, राजवी, विभा, मुस्कान, गुनीशा, वैभवी, साक्षी, लक्ष्मी, दिव्या, प्रेरणा आदि भाग ले रही हैं।
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