एक पल में उजड़ गई हंसती-खेलती दुनिया : उदयपुर हाईवे पर भीषण हादसा, साल भर पहले जिस हमसफर का हाथ थामा था, उसी के साथ थमी सांसें

उदयपुर। कुछ हादसे सिर्फ गाड़ियों के परखच्चे नहीं उड़ाते, बल्कि उन सपनों और उम्मीदों को भी चकनाचूर कर देते हैं जिन्हें कोई परिवार बरसों संजोता है। गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर रविवार की सुबह एक ऐसा ही कलेजा कंपा देने वाला दर्दनाक हादसा हुआ। एक तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक में इस कदर समा गई कि कार सवार नवविवाहित दंपति की मौके पर ही सांसें थम गईं। टक्कर इतनी खौफनाक थी कि जिंदगी बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला और दोनों के शव गाड़ी के लोहे के मलबेएक पल में उजड़ गई हंसती-खेलती दुनिया : उदयपुर हाईवे पर भीषण हादसा, साल भर पहले जिस हमसफर का हाथ थामा था, उसी के साथ थमी सांसें
 के बीच ही फंसे रह गए।
अभी तो हाथों की मेहंदी का रंग भी गहरा था…
जरा सोचिए, उस बूढ़े माता-पिता पर क्या गुजर रही होगी जो अपने बच्चों के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे। 25 वर्षीय मुकेश कुमार चौधरी और 22 वर्षीय प्रियंका साहनी की शादी को अभी ठीक से एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। 28 मई 2025 को आर्य समाज में दोनों ने सात फेरे लेकर एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा किया था। किसे पता था कि जिंदगी का यह सफर इतनी जल्दी और इस मोड़ पर खत्म हो जाएगा। दोनों का कोई बच्चा नहीं था, बस आंखों में सुनहरे भविष्य के अनगिनत सपने थे, जो एक झटके में हाईवे की असामयिक मौत की आगोश में सो गए।
कोटा से भीनमाल : आखिरी सफर बन गई घर वापसी
मुकेश कोटा में अपनी एक मोबाइल शॉप चलाते थे और कड़ी मेहनत से अपनी नई गृहस्थी को संवार रहे थे। वे अपनी पत्नी प्रियंका के साथ कोटा से उदयपुर होते हुए जालोर जिले के भीनमाल स्थित अपने पैतृक गांव ‘निंबावास’ जा रहे थे। अपनों से मिलने की खुशी में सुबह-सुबह का सफर चल रहा था, लेकिन जेलानी के पास काल बनकर खड़े एक ट्रेलर से उनकी कार टकरा गई।
मशक्कत से निकाले गए शव: सुबह 6:45 बजे जब यह हादसा हुआ, तो चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े। कार की हालत देखकर हर आंख नम हो गई। गोगुंदा थाना पुलिस और ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद कार की चादरों को काटकर दोनों के शवों को बाहर निकाला।
अस्पताल की मोर्चरी में पसरा सन्नाटा: जिन चेहरों पर कुछ घंटों पहले मुस्कान थी, वे अब गोगुंदा सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में शांत पड़े हैं। पुलिस ने ट्रेलर चालक को हिरासत में ले लिया है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कानून की कोई भी धारा उस बूढ़े आंगन को उसके चिराग वापस नहीं लौटा सकती जो इस हाईवे की भेंट चढ़ गए।
यह हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़कों पर रफ्तार का एक पल का असंतुलन कैसे कई जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर देता है।

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