
स्रोत : न्यूयॉर्क टाइम्स
उदयपुर। उदयपुर के रक्तदान हीरो रविंद्रपाल सिंह कप्पू, जिन्होंने 100 से अधिक बार रक्तदान कर लोगों की जान बचाई, उनको तो आप जानते ही हैं, वैसे ही शख्स थे ऑस्ट्रेलिया के जेम्स हैरिसन, जिनका हाल ही में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया, इतिहास में सबसे अधिक प्लाज्मा दान करने वालों में से एक रहे।
उन्होंने जीवन भर कुल 1,173 बार प्लाज्मा दान किया, और इसके माध्यम से उन्होंने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व योगदान दिया, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी भी बचाई। उनके दान में एक विशेष एंटीबॉडी थी, जिसे “हैरीसन एंटीबॉडी” के नाम से जाना जाता है। इस एंटीबॉडी का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा बनाई, जिसने ऑस्ट्रेलिया में अनुमानित 2.4 मिलियन शिशुओं को एक जानलेवा बीमारी से बचाया।
हैरीसन का प्लाज्मा विशेष रूप से रिसस डिमॉलीशियन सिंड्रोम (Rh Disease) के इलाज में प्रभावी था। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक गर्भवती महिला का रक्त Rh-नेगेटिव होता है, और उसके भ्रूण का रक्त Rh-पॉजिटिव होता है, जिससे नवजात शिशु में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
जेम्स हैरिसन का प्लाज्मा इस रोग के इलाज में बेहद कारगर था, जिससे बच्चे और उनकी माताएं दोनों सुरक्षित रह पाते थे। उनका दान किसी व्यक्ति की ओर से किए गए सबसे बड़े चिकित्सा योगदानों में से एक बन गया। इसे लेकर वैज्ञानिकों का मानना था कि हैरिसन का रक्त विशेष रूप से इस दुर्लभ एंटीबॉडी को उत्पन्न करने में सक्षम था, और यह तब से लेकर आज तक लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ है।
जेम्स हैरिसन का प्लाज्मा दान न केवल एक चिकित्सीय सफलता थी, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी था कि एक व्यक्ति का सरल कार्य भी समाज में कितनी बड़ी बदलाव ला सकता है। उनके योगदान को आज भी पूरी दुनिया में याद किया जाएगा, और उनके जैसे दानी व्यक्तित्व के कारण लाखों शिशुओं का जीवन बच पाया।
उनकी यह कहानी आज भी प्रेरणा देती है कि एक छोटा सा योगदान भी समाज में बड़ा फर्क डाल सकता है।
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