
उदयपुर। एक तरफ जंगलों को बचाने की कसमें खाई जाती हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं जंगलों के पहरेदार हरियाली को अपने ही लालच की भेंट चढ़ा रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आज उदयपुर में वन विभाग के दो अफसरों को 4.61 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा। जी हां, वन संरक्षण की शपथ लेने वाले ये अधिकारी खुद ही नोटों की गड्डियों के ‘वृक्षारोपण’ में व्यस्त थे।
“हरियाली बचाओ नहीं, हरियाली बांटो” नीति
मामला कुछ यूं है कि एक ठेकेदार ने वन विभाग के विभिन्न क्षेत्रों में मृदा कार्य, चौकी निर्माण और टिकट विंडो जैसे सरकारी काम किए थे। अब भुगतान लेने की बारी आई, तो अफसरों ने अपना ‘हरी-हरी फीस’ मांगना शुरू कर दिया। क्षेत्रीय वन अधिकारी धीरेन्द्र सिंह ने कुल 34.43 लाख रुपये के बिल पास करने के लिए 10.60% डीएफओ और सीसीएफ साहब के लिए और 12.40% खुद व अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांगी। कुल मिलाकर “कमीशन व्यवस्था” इतनी व्यवस्थित थी कि पैसे ऊपर से नीचे तक धड़ल्ले से बहते।
“रिश्वत लेते पकड़े गए, अब पेड़ों को न्याय मिलेगा?”
शिकायत मिलते ही ACB की टीम ने पूरे प्लान के साथ जाल बिछाया और आरोपी धीरेन्द्र सिंह व वनरक्षक अब्दुल रऊफ को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। लेकिन सवाल ये है कि क्या केवल छोटे अधिकारी पकड़ने से पूरा खेल खत्म हो जाएगा? या फिर इस खेल के असली ‘महानायकों’ तक जांच पहुंचेगी?
“कागजों में जंगल, जेबों में पैसा”
वन संरक्षण और पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर थी, वे ही ‘पेड़ गिनने’ की बजाय ‘नोट गिनने’ में जुटे थे। सरकारी योजनाओं की जड़ें सींचने की जगह ये अफसर अपनी जेबें सींच रहे थे। भ्रष्टाचार का ये दीमक सिर्फ वन विभाग तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासन के तमाम दफ्तरों में अपनी मजबूत जड़ें फैला चुका है।
अब देखना यह है कि यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा, या फिर वाकई में इस जंगलराज में सफाई होगी!
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