
उदयपुर। उदयपुर में आयोजित दो दिवसीय रबर उद्योग सम्मेलन के समापन सत्र में पर्यावरण चिंतक डॉ. अनिल मेहता ने ‘ग्रीन’ और ‘हरित’ के बीच महत्वपूर्ण अंतर को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में ग्रीन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे सिद्धांतों का मूल उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और आर्थिक लाभ है। इसके विपरीत, भारत का हरित दृष्टिकोण संसाधनों के संतुलित उपयोग, संरक्षण, और पारिस्थितिकी को प्राथमिकता देता है, जो आर्थिक प्रगति के साथ प्रकृति की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।
सम्मेलन के दौरान इंडियन रबर इंस्टीट्यूट (आईआरआई), राजस्थान इकाई द्वारा आयोजित “सस्टेनेबल सर्कुलैरिटी इन रबर इंडस्ट्रीज: क्वालिटी, कोस्ट, सेफ्टी एंड प्रोडक्टिविटी” विषयक सेमिनार में डॉ. मेहता ने इकोलॉजिकल क्वालिटी, सेफ्टी, और प्रोडक्टिविटी को उद्योगों का प्राथमिक उद्देश्य मानते हुए चर्चा की।

सम्मेलन के समापन सत्र में डॉ. आर मुखोपाध्याय ने रबर और टायर उत्पादन में पर्यावरणीय हितैषी नवाचारों पर प्रकाश डाला। पैनल संवाद में रवि सोनी और अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
जे के टायर लिमिटेड के राजीव भटनागर ने तापमान नियंत्रण में मिट्टी की ट्यूब्स के प्रयोग की सफलता की जानकारी दी, जबकि एन के शर्मा ने व्यक्तिगत जीवनशैली में सुधार के लिए “लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायरमेंट (एलआईएफई)” के सरल सूत्रों को प्रस्तुत किया। सम्मेलन में डॉ. विक्रम सिंह कुमावत को आर एस ग्रुप द्वारा स्थापित कमलबीर सम्मान से सम्मानित किया गया।
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