पंजाब के राज्यपाल सियासत के महामहिम गुलाबचंद कटारिया का प्रहार…मीडिल ईस्ट में मिसाइलें तो उदयपुर में चल रहे चिट्ठी बम

 

उदयपुर। दुनिया की नजरें इस वक्त टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े महायुद्ध का ऊंट किस करवट बैठेगा। ट्रंप उस मोड़ पर हैं जहां से लौटना नामुमकिन है और बाजी पलटने का डर है। भारत में भी पांच राज्यों के चुनावी रण में दिग्गजों ने ताल ठोक रखी है। लेकिन, झीलों की नगरी उदयपुर का मिजाज कुछ अलग ही कहानी कह रहा है। यहां न तो आईपीएल का रोमांच सिर चढ़कर बोल रहा है, न ही अंतरराष्ट्रीय तनाव की चिंता है। यहां तो चर्चा का केंद्र है— सियासत के ‘महामहिम’ बनाम अपनों की गुटबाजी और ‘उदयपुर फाइल्स’ का खौफनाक सच।

ईरान में जिस तरह जमीन से 500 मीटर नीचे से मिसाइलें दागी जा रही हैं, ठीक उसी अंदाज में उदयपुर भाजपा के विरोधी खेमे ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘किस्सा-गोई’ का वार शुरू कर दिया है। 10 साल पुराने वीडियो और चिट्ठी बम फोड़े जा रहे हैं, लेकिन असली धमाका तो ‘उदयपुर फाइल्स’ ने किया है।

ईरान में युद्ध रुकने का इंतज़ार, उदयपुर में ‘एक्शन’ की दरकार
पूरी दुनिया को आज ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध थमने का इंतज़ार है ताकि शांति बहाल हो सके। लेकिन उदयपुर की फिजाओं में एक अलग इंतज़ार है। यहाँ भाजपा का एक धड़ा बेहद बेचैन है— उन्हें इंतज़ार है उन ‘दागी’ और आरोपी नेताओं पर कार्रवाई का, जिनके नाम ‘उदयपुर फाइल्स’ (उदयपुर एपिस्टीन फाइल) के विवाद में उछल रहे हैं। दुष्कर्म के आरोपों और वायरल वीडियो की इस ‘फाइल’ ने उदयपुर भाजपा को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। विरोधी पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी अपने ही घर के इन किरदारों पर लगाम कसेगी या फिर सिर्फ जुबानी जंग ही चलती रहेगी?

“समय अच्छे-अच्छों का इलाज करता है” : कटारिया का तीखा पलटवार
इसी गहमागहमी के बीच, गुलाबचंद कटारिया ने हाल ही में हुई एक प्रेस वार्ता में अपने विरोधियों को आइना दिखाया। पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के वीडियो और चिट्ठी बम पर उन्होंने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कहा:

“वो (पूर्व विधायक) क्यों सिर्फ एक बार चुनाव लड़कर मैदान छोड़ गए? हम जनता की सेवा करते हैं तो उनमें खड़े रहने का दम भी रखते हैं। इनके दर्द कहीं और हैं और बता कहीं और रहे हैं। इस रोग का कोई इलाज नहीं, समय अच्छे-अच्छों का इलाज कर देता है।”

प्रेस वार्ता के मुख्य प्रहार: बेबाकी और तंज
मूल्यांकन जनता करेगी: कटारिया ने साफ कहा कि वे विरोधियों को सिर्फ सुन रहे हैं। “वो विद्वान लोग हैं, सालों का ज्ञान है उनके पास। मेरा मूल्यांकन जनता करेगी और उनका भी जनता ही करेगी।”

उदयपुर प्रेम पर सवाल: राज्यपाल के उदयपुर दौरों पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने अपना तीन महीने का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए चुनौती दी, “डायरेक्टरी उठाकर किसी भी 20 लोगों को फोन कर पूछ लें, मुझे छोटा बच्चा भी पहचानता है। कई तो 5 साल राज्यपाल रहकर निकल जाते हैं और लोगों को नाम तक याद नहीं रहता।”

बेदाग छवि का दावा: राष्ट्रपति को लिखी गई विरोधियों की चिट्ठी पर महामहिम बोले, “40-50 साल से जनता के बीच हूं। बिना उनकी मेहरबानी के जिंदा नहीं रह सकता। मुझ पर कोई दाग नहीं लगा सका। जो गलत काम में इन्वॉल्व होता है, वो मेरी आंखों से उतर जाता है।”

मैदान छोड़ना शोभा नहीं देता…

भाजपा की वर्तमान स्थिति और गुटबाजी पर कटारिया ने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर होने के नाते वे पार्टी लाइन पर नहीं बोलेंगे, लेकिन विरोधियों की ‘हिम्मत’ पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने कहा, “हार-जीत चलती रहती है, हम भी इंदिरा गांधी के दौर में 1100 वोटों से हारे थे। लेकिन हिम्मत हार जाना और मैदान छोड़ देना शोभा नहीं देता।”

उदयपुर की राजनीति आज दोराहे पर है। एक तरफ कटारिया का अटूट आत्मविश्वास है, तो दूसरी तरफ ‘उदयपुर फाइल्स’ का काला साया, जिसने भाजपा के अनुशासित ढांचे को सवालों के घेरे में ले लिया है। युद्ध के मैदान में मिसाइलें चल रही हैं, लेकिन उदयपुर के सियासी मैदान में जो ‘चिट्ठी बम’ और ‘फाइल्स’ खुल रही हैं, उनका असर आने वाले वक्त में किसी महायुद्ध से कम नहीं होगा। फिलहाल तो ‘महामहिम’ के तीखे प्रहारों ने विरोधियों को आत्मचिंतन पर मजबूर कर दिया है।

 

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