
उदयपुर। शैक्षणिक excellence और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय अपने 40वें स्थापना दिवस को आगामी 12 जनवरी को भव्य रूप से मनाने जा रहा है। समारोह एग्रीकल्चर संकाय के कृषि भवन सभागार में प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा, जिसमें विश्वविद्यालय के डीन, डायरेक्टर, अकादमिक एवं गैर-अकादमिक स्टाफ, विद्यार्थी, शहर के गणमान्य नागरिक और पूर्व कार्यकर्ता शामिल होंगे।
इस विशेष अवसर पर कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित तैयारी बैठक में सभी तैयारियों की समीक्षा की गई। प्रो. सारंगदेवोत ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह का उद्देश्य न केवल विश्वविद्यालय के गौरव को प्रदर्शित करना है, बल्कि सुदूर आदिवासी और वंचित वर्ग तक शिक्षा की अलख पहुंचाने वाले संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर के विजन का सम्मान भी करना है।
इतिहास की झलक : राजस्थान विद्यापीठ की नींव 1937 में तीन रुपये और पांच कार्यकर्ताओं के साथ रखी गई थी। स्वतंत्रता से दस वर्ष पूर्व स्थापित इस संस्था को 12 जनवरी 1987 को यूजीसी द्वारा डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया।
समारोह की खासियत : स्थापना दिवस की शुरुआत श्रमजीवी महाविद्यालय और प्रतापनगर परिसर में लगी जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर सम्मान देने के साथ होगी। इसके बाद विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो विश्वविद्यालय के गौरव और शिक्षा की महत्ता को प्रदर्शित करेंगे।
तैयारी बैठक में प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. निवेदिता, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. राजन सूद, डॉ. लीली जैन, डॉ. बबीता रशीद, डॉ. बीएल श्रीमाली, निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. हिम्मत सिंह चूण्डावत सहित अन्य समिति सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की जिम्मेदारियों का बंटवारा किया।
इस 40वें स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक परंपरा का उत्सव मना रहा है, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व और संस्थापक के आदर्शों को जीवंत करने का संदेश भी दे रहा है।
स्रोत : कृष्णकांत कुमावत, निजी सचिव वाइस चांसलर
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