खान एवं भू विज्ञान विभाग एवं खनन उद्योग के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक

उदयपुर। उदयपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के माइनिंग सब कमिटी के सौजन्य से “माइनिंग क्षेत्र में आ रही चुनोतियों एवं नई नीतियों” को लेकर शुक्रवार को एक बैठक का आयोजन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के सभागार में खान एवं भू विज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक दीपक तंवर के मुख्य आतिथ्य, सीटीएई महाविद्यालय के माइनिंग विभाग के हैड डॉ अनुपम भटनागर, माइनिंग इंजीनियरिंग एसोसिएशन उदयपुर चैप्टर के अध्यक्ष मधुसूदन पालीवाल, माइनिंग इंजीनियर आसिफ अंसारी के विशिष्ट आतिथ्य तथा माइनिंग सब कमिटी के चैयरमैन मांगीलाल लुणावत की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
समिति के सदस्य एवं समन्वयक डॉ हितांशु कौशल ने बताया कि वर्तमान में “माइनिंग क्षेत्र में आ रही चुनोतियों एवं नई नीतियों” को लेकर कुछ प्रमुख बिंदुओं *”खनन उद्योग में आ रही नवीनतम चुनौतियाँ और परिवर्तन।”, “अरावली पर्वतमाला में खनन के मामले और सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम निर्णय पर विचार।”,

“DEIAA से SEIAA में स्थानांतरण और इसकी वर्तमान स्थिति।”,”खनन को सुगम बनाने और त्वरित मंजूरी की प्रक्रिया।”,
“खनन और पर्यावरण संबंधित मुद्दे।”, रॉयल्टी पर GST के मुद्दे पर चर्चा।”, “खनिज उद्योग पर लागू होने वाले ट्रांजिट पास की चर्चा।”, “खनन पट्टे के विस्तार के मुद्दे”, तथा सदन की अनुमति से अन्य मुद्दों को लेकर विभिन्न विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श किया गया।

मुख्य अतिथि पद से उद्धबोधन देते हुए उदयपुर क्षेत्र के खनन विभाग के अतिरिक्त निदेशक दीपक तंवर ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने खनन उद्योग और उनके प्रतिनिधियों द्वारा साझा की गई समस्याओं का समाधान हेतु टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि सरकार खनन व्यापार को सुगम बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने अरावली पर्वतमाला के मुद्दों और उनके प्रभावों, रॉयल्टी पर GST, और SEIAA से खनन पट्टाधारकों को सुगमता से पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि हजारों आवेदन पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं और जल्द ही पर्यावरणीय मंजूरी दी जाएगी। ट्रांजिट पास के मामले में, उन्होंने बताया कि खनिज प्रसंस्करण उद्योग को महत्वपूर्ण राहत देने के लिए एक नई नीति तैयार की जा रही है। उन्होंने पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक मामलों से संबंधित मुद्दों पर भी संक्षिप्त जानकारी दी।
बैठक के प्रारंभ में अध्यक्ष मांगीलाल लुणावत द्वारा खनन उद्योग के समक्ष आ रही समस्याओं और चुनौतियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया और बताया कि कैसे सरकार इन चुनौतियों को एक अवसर में बदलने में हमारी मदद कर सकती है।
यूसीसीआई (उदयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) की प्रतिनिधि अंशु कोठारी ने यूसीसीआई द्वारा की गई गतिविधियों प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और बताया कि इस क्षेत्र के विकास में खनन उद्योग की मजबूत उपस्थिति है और चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की भूमिका महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ डॉ. अनुपम भटनागर ने अपने सुझाव प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे उद्योग और पर्यावरण एक साथ मिलकर देश की प्रगति और सतत विकास में भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि उचित खनन तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है ताकि खनन उद्योग की सही तस्वीर प्रस्तुत की जा सके और यह दिखाया जा सके कि खनन उद्योग देश के विकास में एक मजबूत स्तंभ है।
CTAE के खनन इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख के रूप में उन्होंने कहा कि उन्होंने खनन और पर्यावरण से संबंधित कई मामलों में एक समिति विशेषज्ञ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे सकारात्मक और तथ्यात्मक नोट प्रस्तुत किए जा सके। एमईएआई अध्यक्ष उदयपुर चैप्टर ने बताया है कि हम उद्योग का समर्थन कर रहे हैं और एम-सैंड नीति के बारे में अपनी विशेष राय दी। उदयपुर के खनन इंजीनियर आसिफ अंसारी ने उनकी मजबूत सकारात्मक सोच को जाहिर किया है कि उद्योग के साथ मिलकर विकास में काम करना चाहते हैं और उन्होंने कहा है कि हम संभावनात्मक चुनौतियों के समाधान हेतु 24 घंटे उपलब्ध हैं।
इस बैठक में खनन उद्योग से जुड़े लब्ध प्रतिष्ठित उद्योगपति उपस्थित रहे। धन्यवाद की रस्म यूसीसीआई के उपाध्यक्ष दिलीप तलेसरा ने तथा बैठक का संयोजन डॉ हितांशु कौशल ने किया।
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