उदयपुर नगर निगम बजट 2026-27 : नौकरशाही के भरोसे विकास का ‘रोडमैप’, 589 करोड़ का लेखा-जोखा पेश

उदयपुर। शहर की सरकार (नगर निगम) का बोर्ड भंग होने के बीच इस बार का वार्षिक बजट पूरी तरह अधिकारियों की मेज पर तैयार होकर पारित हुआ है। निगम प्रशासक प्रज्ञा केवलरमणि की अध्यक्षता में मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 589.77 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में पेश किए गए इस बजट में शहर के सौंदर्य, नए जुड़़े क्षेत्रों (पेरिफेरी) और एलिवेटेड रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस रखा गया है।

आय के मोर्चे पर आत्मनिर्भरता की कोशिश : निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बजट के वित्तीय ढांचे को स्पष्ट करते हुए बताया कि इस वर्ष आय बढ़ाने के लिए कड़े लक्ष्य रखे गए हैं। पिछले वर्ष की 105% उपलब्धि से उत्साहित निगम ने इस बार 22.5 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा है। भू-संपत्तियों की नीलामी से 10 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।

सरकारी अनुदान : राज्य और केंद्र वित्त आयोग से करीब 45 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद जताई गई है।

बुनियादी ढांचा : एलिवेटेड रोड और अंडरग्राउंड केबलिंग

बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगा। निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, शहर के आसमान में फैले बिजली के तारों के जाल को खत्म करने के लिए 5 करोड़ रुपये से अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर नई पार्किंग विकसित करने हेतु 3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

विस्तारित उदयपुर पर विशेष ध्यान

निगम सीमा में हाल ही में शामिल हुई ग्राम पंचायतों के लिए बजट में अलग से 10 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है। इन नए क्षेत्रों में सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, नई सड़कों के निर्माण के लिए 10 करोड़ और कच्ची बस्तियों के सुधार के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

लोकतांत्रिक शून्यता का असर : लंबे समय बाद यह पहला अवसर है जब बजट निर्माण में पार्षदों या महापौर की कोई भूमिका नहीं रही। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बनाए गए इस बजट में ‘मैक्रो’ (बड़े प्रोजेक्ट्स) पर तो ध्यान है, लेकिन ‘माइक्रो’ यानी वार्ड स्तर की उन छोटी समस्याओं की अनदेखी दिखती है जिन्हें अक्सर जन-प्रतिनिधि पुरजोर तरीके से उठाते हैं।

स्वच्छता का आर्थिक असंतुलन : निगम घर-घर कचरा संग्रहण पर 6.80 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है, जबकि जनता से ‘यूजर चार्ज’ के रूप में मात्र 3 करोड़ की वसूली का लक्ष्य है। यह 50% से भी कम की वसूली दर्शाती है कि स्वच्छता प्रबंधन के वित्तीय मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

पर्यावरण और पर्यटन : कागजी या धरातली?

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत 8.24 करोड़ रुपये खर्च होंगे, लेकिन इसका मुख्य उपयोग ‘सीमेंट ब्लॉक’ लगाने में किया जाना चौंकाने वाला है। वायु प्रदूषण कम करने के लिए वृक्षारोपण और डस्ट कंट्रोल जैसे ठोस उपायों के बजाय निर्माण कार्यों पर जोर देना आलोचना का विषय हो सकता है।

प्रमुख सुझाव : कैसे बेहतर बने क्रियान्वयन?

पार्किंग का अभाव : उदयपुर जैसे पर्यटन केंद्र के लिए 3 करोड़ की राशि बहुत कम है। निगम को बहुमंजिला पार्किंग के लिए पीपीपी मॉडल पर विचार करना चाहिए।

सोशल ऑडिट की जरूरत : चूंकि बोर्ड मौजूद नहीं है, इसलिए बजट में आवंटित राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए प्रबुद्ध नागरिकों की एक निगरानी समिति बनाई जानी चाहिए।

कच्ची बस्तियों की उपेक्षा : नए क्षेत्रों और वीआईपी सड़कों के मुकाबले कच्ची बस्तियों के लिए मात्र 1 करोड़ का प्रावधान सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकता है, जिसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।

कुल मिलाकर, 2026-27 का यह बजट उदयपुर को ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में एक संतुलित प्रशासनिक कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारियों की यह टीम बिना जन-दबाव के कितनी ईमानदारी से इन योजनाओं को धरातल पर उतारती है।

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