दुनिया के लिए अच्छी खबर : अमेरिका और ईरान के बीच ‘शांति समझौते’ पर सहमति; इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर

वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और युगांतकारी सफलता हाथ लगी है। अमेरिका और ईरान दोनों ने ही एक ‘शांति समझौते’ (Peace Deal) पर सहमति बनने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक शांति समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच समझौता अब पूरी तरह से प्रभावी हो चुका है।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने किया ब्लॉकचेन और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 80वें जन्मदिन के अवसर पर इस समझौते को पूर्ण बताते हुए घोषणा की कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘द न्यूयार्क टाइम्स’ से बातचीत में संकेत दिए कि अंतिम समझौते के तहत तेहरान को केवल निम्न-स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (Low-Level Uranium Enrichment) की अनुमति होगी, जिसका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए कभी नहीं किया जा सकेगा।

ट्रंप का बड़ा बयान: राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा लेबनान पर किए गए हालिया हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें एक ‘मुश्किल व्यक्ति’ बताया। ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू को इस समझौते के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए, क्योंकि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता, तो इजरायल की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो जाता।

क्या है इस 14-सूत्रीय समझौते के मसौदे में?

ईरान की समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के अनुसार, इस शांति समझौते के मसौदे में कुल 14 मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:

तत्काल युद्धविराम : लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तुरंत और स्थायी रूप से रोक दी जाएंगी।

आर्थिक प्रतिबंधों में ढील : अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली जाएगी। साथ ही ईरानी तेल की बिक्री पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा।

फ्रीज संपत्ति की बहाली : 60 दिनों की तकनीकी वार्ता अवधि के दौरान अमेरिका द्वारा फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की 24 अरब डॉलर ($24 Billion) की संपत्ति को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।

विवादास्पद मुद्दे हटे : सबसे खास बात यह है कि इस वार्ता के एजेंडे से ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रतिरोध समूहों को उसके समर्थन से जुड़े विवादित मुद्दों को पूरी तरह हटा दिया गया है।

वैश्विक बाजारों में भारी उछाल, कच्चे तेल के दामों में 4% की गिरावट

समझौते की आधिकारिक पुष्टि होते ही दुनिया भर के वित्तीय बाजारों ने राहत की सांस ली है。

शेयर बाजार चमके : एशिया-पैसिफिक बाजारों में जबरदस्त तेजी देखी गई। जापान का निक्केई (Nikkei) इंडेक्स 5% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 5.7% से अधिक उछल गया। इसके अलावा ताइवान, इंडोनेशिया और फिलीपींस के शेयर बाजारों में भी भारी बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी वायदा बाजार (US Futures) भी मजबूत होकर खुले हैं।

कच्चा तेल हुआ सस्ता: वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग (Strait of Hormuz) खुलने की खबर से वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत गिरकर लगभग $83.70 प्रति बैरल पर आ गई है। इससे दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

 

राजनैतिक प्रतिक्रियाएं: ओबामा के पूर्व सहयोगियों ने बताया देर से आया दुरुस्त कदम

इस शांति समझौते पर अमेरिका के भीतर ही राजनीति गर्मा गई है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सहयोगियों और पूर्व राजनयिक रॉबर्ट मैली ने समझौते का स्वागत किया, लेकिन साथ ही ट्रंप की पूर्ववर्ती नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए इस युद्ध को ‘गैर-जिम्मेदाराना और बेहद खर्चीली भूल’ करार दिया।

उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण ही होर्मुज जलमार्ग बंद हुआ था, जिससे दुनिया भर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। प्रगतिशील डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने भी इस युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी जनता के लिए तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होंगी। हालांकि, ट्रंप के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इस समझौते पर संदेह जताते हुए ईरान पर भरोसा न करने की बात कही है。

 

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