भारत में पहली सरकारी AI क्लिनिक से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मिलेगा नया मुकाम

नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS) में हाल ही में भारत की पहली सरकारी AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) क्लिनिक का उद्घाटन किया गया। यह पहल देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में उन्नत तकनीक को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस क्लिनिक का उद्देश्य बीमारियों का प्रारंभिक पता लगाना, निदान और उपचार प्रक्रिया में सुधार करना है, जो मरीजों की जीवन रक्षा और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में अहम भूमिका निभा सकता है। क्लिनिक में जीन स्क्रीनिंग के लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कैंसर, हृदय रोग, गुर्दा और लीवर से जुड़ी बीमारियों का तेजी से पता लगाया जा सकेगा।

AI उपकरण डॉक्टरों की मदद करेंगे X-रे, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन, MRI रिपोर्ट और लैब जांच की व्याख्या करने में, जिससे निदान की सटीकता और गति दोनों में सुधार होगा। GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि यह पहल रक्त परीक्षण, इमेजिंग स्कैन और अन्य क्लिनिकल डेटा का विश्लेषण करके चिकित्सीय निर्णय और उपचार योजना में सहायता करेगी। इसके साथ ही यह पहल स्वास्थ्य स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर भी खोलेगी।

AI क्लिनिक का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह दूर-दराज़ और पिछड़े क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होती है। AI टूल्स पहले से कुछ निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक लैब में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी सरकारी अस्पताल में पूरी तरह से समर्पित AI क्लिनिक की स्थापना की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अन्य राज्यों के सरकारी अस्पतालों में भी दोहराया जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवा में AI का योगदान विशेष रूप से पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और कैंसर स्क्रीनिंग में देखा जा रहा है। पैथोलॉजिस्ट AI की मदद से ऊतकों का विश्लेषण कर ऐसे रोग पहचान सकते हैं, जो मानवीय दृष्टि से छूट सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि निदान की सटीकता भी बढ़ती है। AI ने स्तन और फेफड़े के कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे गलत पॉजिटिव और नेगेटिव परिणाम कम होते हैं।

इसके अलावा, AI विशाल जीनोमिक डेटासेट का विश्लेषण कर रोग से जुड़े बायोमार्कर्स और उपचार प्रतिक्रिया की भविष्यवाणी करने में सक्षम है। यह प्रिसिजन थैरेपी में मदद करता है, जिसमें मरीजों के मेडिकल इतिहास, जीवनशैली और जीन डेटा के आधार पर कस्टमाइज्ड दवा और जीवनशैली परिवर्तन सुझाए जा सकते हैं।

इस तरह, GIMS की AI क्लिनिक न केवल भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में तकनीकी उन्नयन का प्रतीक है, बल्कि रोगों के प्रारंभिक पता लगाने, निदान और व्यक्तिगत उपचार में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने का प्रयास है।

 

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