
जयपुर। सरकारी महकमे में बैठे कुछ लोग जनता की भलाई के बजाय अपनी तिजोरी भरने में मशगूल हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के अधीक्षण अभियंता अविनाश शर्मा के ठिकानों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की दबिश ने फिर से सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की सड़ांध को उजागर कर दिया है।
आज तड़के 7 अलग-अलग ठिकानों पर की गई छापेमारी में ACB ने करोड़ों रुपये की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा किया है। 13 लाख रुपये नकद, 100 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज, 1.34 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश और सोने-चांदी के गहने—ये सब एक ऐसे अधिकारी की संपत्ति का हिस्सा हैं, जिसकी तनख्वाह सरकारी नियमों के तहत सीमित होनी चाहिए थी।
“ऑपरेशन 40+”: कैसे खुला भ्रष्टाचार का जाल?
ACB के प्रमुख डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा के अनुसार, कुछ समय पहले ब्यूरो को गुप्त सूचना मिली थी कि JDA के अभियंता अविनाश शर्मा ने भ्रष्ट तरीकों से भारी संपत्ति जुटाई है। जब इसकी गोपनीय जांच की गई, तो 40 से अधिक संपत्तियां उनके नाम से पाई गईं। इसी के बाद “ऑपरेशन 40+” शुरू हुआ, और जब सबूत मजबूत हुए, तो ACB की टीमें एक साथ 7 ठिकानों पर पहुंच गईं।

सरकारी पद का ‘प्राइवेट’ इस्तेमाल
सरकारी नौकरी में रहते हुए करोड़ों की काली कमाई करना कोई नई बात नहीं, लेकिन सवाल यह है कि JDA जैसे बड़े सरकारी विभागों में इस भ्रष्टाचार पर इतनी देर से क्यों कार्रवाई हुई? ACB की इस रेड के बाद यह भी साफ हो गया कि अविनाश शर्मा ने अपने परिजनों और करीबी लोगों के नाम पर भी संपत्तियां खरीदी थीं। इतना ही नहीं, बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध लेन-देन के सबूत भी मिले हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है।
ACB अब इस मामले को पूरी तरह से खंगाल रही है। बैंक लॉकरों की जांच, संपत्तियों की कीमत का सही आकलन और बेनामी निवेश का पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा। अगर सबूत मजबूत हुए, तो अविनाश शर्मा पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है और उनकी संपत्तियों को जब्त भी किया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल—भ्रष्टाचार कब रुकेगा?
JDA जैसे विभाग, जहां शहर के विकास की योजनाएं बनाई जाती हैं, वहां बैठे अधिकारी जनता की भलाई से ज्यादा अपने फायदे की योजनाओं में व्यस्त हैं। अवैध कमाई के इस खेल में सिर्फ एक अभियंता नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था शामिल हो सकती है। सवाल यह है कि क्या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, या फिर भ्रष्टाचार की इस जड़ों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी?
कुर्सी पर बैठकर काली कमाई का यह खेल कब तक चलेगा, इसका जवाब अब सरकार और जांच एजेंसियों को देना होगा।
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