
उदयपुर। अम्बावगढ़ पहाड़ी पर स्थित दरगाह हज़रत गंज शहीदा बाबा के तीन दिवसीय 77वें उर्स की परवानदार शुरुआत शुक्रवार 28 नवम्बर की सुबह परचम कुशाई की रूहपरवर रस्म के साथ हुई। नमाज़-ए-फज्र के बाद कुरआन-ख्वानी का एहतिमाम किया गया, जिसमें अकीदतमंदों ने बड़ी तादाद में शिरकत करते हुए कलाम-ए-पाक की तिलावत की। सुबह आठ बजे दरगाह शरीफ पर परचम कुशाई अदा की गई, जबकि नमाज़-ए-असर के बाद हुसैनी परचम की बुलंद दरवाजे पर रस्म अंजाम दी गई। रात में नमाज़-ए-ईशा के बाद महफ़िल-ए-मिलाद का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्तलिफ मशायख व नातख़्वाँ हज़रात ने तकरीरें और नातिया क़लाम पेश किए।
दरगाह कमेटी के सदर गुलाम मोइनुद्दीन क़ादरी (राजा भाई) ने बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी उर्स-ए-मुबारक सूफ़ी निसार अहमद क़ादरी बासनी, नागौर शरीफ की सरपरस्ती में बड़ी अकीदत व एहतराम से मनाया जा रहा है। उर्स के दौरान तमाम मज़ाहिब के लोग आस्ताना-ए-आलिया पर फूल, इत्र और चादर शरीफ पेश करते हैं। मन्नत पूरी होने पर दूध-दलिया तैयार कर फ़ातिहा दिलवाई जाती है और तबर्रुक तक़सीम किया जाता है। इंतेज़ामिया कमेटी की जानिब से तीनों दिन आम लंगर का भी पूरा इंतज़ाम किया गया है, और जायरीनों की सहूलियत के लिए मुख्तलिफ कमेटियों को ज़िम्मेदारियाँ सौंप दी गई हैं।
उर्स के दूसरे दिन 29 नवम्बर, शनिचर की रात नमाज़-ए-ईशा के बाद महफ़िल-ए-सिमा व क़व्वाली सजाई जाएगी। जयपुर से ख़ुसूसी क़व्वाल जुबै़र नईम अजमेरी, साथ ही दरगाह के दस्तारबंद क़व्वाल रफ़ीक मस्ताना वारिसी तथा मस्ताना अख़्लाक़ सुल्तानी (इंटरनेशनल क़व्वाल) अपने कलाम पेश करेंगे। रात एक बजे सुगंधबार सन्दल की रस्म अदा की जाएगी।
उर्स के तीसरे दिन 30 नवम्बर, इतवार को नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद महफ़िल-ए-कुल का आग़ाज़ होगा, जिसमें क़व्वाल पार्टियाँ बारगाह-ए-अक़्दस में नज़र-ए-अक़ीदत पेश करेंगी। नमाज़-ए-असर के बाद कुल की फ़ातिहा के साथ इस सालाना रूहानी जलसे का पुरअम्न इक्तिताम होगा।
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