
वाशिंगटन/तेहरान | मध्य-पूर्व में युद्ध अब एक ऐसे बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता धुंधला दिखाई दे रहा है। 15 मार्च 2026 को जारी ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष को और अधिक आक्रामक बनाने के संकेत दिए हैं।
होर्मुज की घेराबंदी और वैश्विक दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की है कि वे अपनी नौसेना के युद्धपोत ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) में भेजें। ट्रंप का रुख स्पष्ट है: “जो देश खाड़ी से तेल लेते हैं, वे इस मार्ग की रक्षा की जिम्मेदारी भी उठाएं।” साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना ईरान की तटरेखा (Shoreline) पर तब तक बमबारी जारी रखेगी, जब तक यह समुद्री मार्ग सुरक्षित नहीं हो जाता।
इस्फहान में भारी तबाही
अमेरिकी और इज़राइली मिसाइलों ने ईरान के मध्यवर्ती प्रांत इस्फहान को निशाना बनाया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, एक फैक्ट्री पर हुए हमले में कम से कम 15 श्रमिकों की मौत हो गई है। जवाब में, ईरान के IRGC ने इज़राइल के औद्योगिक क्षेत्रों और इराक-कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं।
अमेरिकी जनता का रुख
एक ताजा सर्वे (Quinnipiac University) के अनुसार, 53% अमेरिकी मतदाता ईरान पर इन हमलों के खिलाफ हैं। घरेलू स्तर पर बढ़ती तेल की कीमतें और शेयर बाजार की गिरावट ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन रही है।
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