सियासी कड़वा सच : जब ऊर्जा मंत्री के सामने ही गुल हो गई ‘पावर’, तो आम जनता की कौन सुनेगा सरकार?

जयपुर बीजेपी दफ्तर का ‘अंधेरा’ बना प्रदेश का सबसे बड़ा मुद्दा, जनता बोली- “जब वीआईपी की बत्ती गुल तो हमारी क्या औकात”

भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से जूझ रहे राजस्थान के लिए सबसे बड़ा व्यंग्य बनी यह घटना

जयपुर/उदयपुर। इस भीषण और रिकॉर्डतोड़ गर्मी में अगर आपके घर की बिजली चली जाए, तो अब आप कुछ नहीं कर सकते। न शिकायत, न गुस्सा। क्योंकि जब खुद सूबे के ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में सत्ताधारी दल (भाजपा) के प्रदेश मुख्यालय की बत्ती गुल हो सकती है और सिस्टम कुछ नहीं कर पाता, तो भला डिस्कॉम के छोटे-मोटे इंजीनियर और अफसर आपकी क्यों सुनेंगे और ‘कई’ (क्या) करेंगे? जयपुर के बीजेपी दफ्तर में हुआ यह ‘पावर कट’ वाकया अब राजस्थान की आम जनता के लिए एक दर्दभरा मजाक और सरकार के लिए सबसे बड़ी फजीहत बन चुका है।

याद रहे कि राजधानी जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को एक ऐसा असहज करने वाला नजारा दिखा, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। मंच पर उनके ठीक बगल में राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर विराजमान थे, जो प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे।

लेकिन ऐन वक्त पर बिजली विभाग ने अपने ही मंत्री को ‘करंट’ दे दिया। एक-दो बार नहीं, बल्कि कुल 3 बार बिजली गुल हुई। 13 मिनट तक पूरा हॉल मरुस्थल की रात जैसा अंधेरा हो गया। बिजली संकट को लेकर चौतरफा घिरे ऊर्जा मंत्री असहज होकर हॉल से बाहर ही खिसक गए, जबकि कार्यकर्ताओं को मोबाइल की फ्लैश लाइट (टॉर्च) जलाकर रेल मंत्री के लिए रोशनी करनी पड़ी।

आम जनता का तीखा सवाल- “इंजीनियर साहब हमारी सुनेंगे क्या?”

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर राजस्थान के उपभोक्ताओं का गुस्सा और तंज बाढ़ की तरह बह निकला है। लोग पूछ रहे हैं कि:

जब केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को 13 मिनट तक पसीने से तर-बतर होकर अंधेरे में बैठना पड़ सकता है, तो गांवों और कस्बों में बैठे अधिशासी अभियंता (XEN) या कनिष्ठ अभियंता (JEN) आम नागरिक की फोन कॉल क्यों उठाएंगे?

जब वीआईपी और सत्ता के सबसे बड़े केंद्र को बिजली विभाग अघोषित कटौती से नहीं बचा पाया, तो आम आदमी की बिजली जाने पर तो अफसर सीधे हाथ खड़े ही करेंगे।

“नेताजी जब मंच से आंकड़ों की झूठी तुलना कर रहे थे, तो मानो बिजली से भी यह बर्दाश्त नहीं हुआ और वह चली गई।” — टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष

दावों की खुली पोल, जनता बेहाल

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस एक घटना ने विपक्ष के उन आरोपों पर मुहर लगा दी है, जिसमें कहा जा रहा था कि सरकार के पास इस बार भीषण गर्मी से निपटने का कोई मास्टर प्लान नहीं था। जब खुद सत्ताधारी पार्टी का प्रदेश मुख्यालय सुरक्षित नहीं है, तो इस 45 से 48 डिग्री की जानलेवा गर्मी में प्रदेश की आम जनता, बीमार बुजुर्ग और अबोध बच्चे किस बदहाली और ‘नरक’ से गुजर रहे होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब जनता बिजली विभाग से उम्मीद छोड़ चुकी है, क्योंकि जहाँ ‘ऊर्जा मंत्री’ खुद बेबस होकर हॉल से बाहर चले जाएं, वहां आम उपभोक्ता सिर्फ भगवान भरोसे है।

 

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