
उदयपुर। आज उदयपुर की फिजाओं में सिर्फ मंत्रों की गूंज नहीं है, बल्कि उन 51 जोड़ों की उम्मीदों की खनक भी है, जिन्होंने कभी सोचा था कि शायद उनकी दुनिया कभी मुकम्मल नहीं हो पाएगी। नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ में आज से 45वाँ नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह शुरू हो चुका है। यह महज़ एक रस्म नहीं, उन आँखों के सपनों का साकार होना है, जिनमें अभावों के कारण कभी नमी रहती थी।
दो रूहें, एक सा संघर्ष : मधु और संतोष की दास्तां
इस उत्सव के बीच एक ऐसी कहानी है जो पत्थर दिल इंसान को भी भावुक कर दे। उदयपुर की मधु भोई, जिनके एक पैर ने साथ छोड़ दिया था, पर जिनके हौसलों ने कभी हारना नहीं सीखा। पिता के साये के बिना, तंगहाली के बीच ब्यूटी पार्लर में काम करते हुए उन्होंने अपने परिवार की ढाल बनना चुना।
वहीं मध्यप्रदेश के संतोष कुमार लोढ़ा, जिन्हें बचपन में ही पैरालिसिस ने जकड़ लिया था। लेकिन संतोष ने अपनी लाचारी को अपनी पहचान नहीं बनने दी। वे आज एक शिक्षक के रूप में समाज को रौशनी दिखा रहे हैं। जब ये दो संघर्षशील जीवन एक-दूसरे से मिले, तो इन्हें शारीरिक कमियों में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अटूट आत्मविश्वास में अपना ‘हमसफर’ नजर आया।
“दिव्यांगता शरीर की एक अवस्था हो सकती है, लेकिन जब दो दिल एक-दूसरे के दर्द को समझने लगें, तो वह ईश्वर की सबसे सुंदर रचना बन जाती है।”
एक नया संसार, एक नई उम्मीद
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में, कल ये 51 जोड़े पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर एक नए सफर पर निकलेंगे। इनमें से कई वो हैं जिनका कभी संस्थान ने इलाज किया, किसी को कृत्रिम अंग दिए, तो किसी को आत्मनिर्भर बनाया। आज संस्थान उन्हें सिर्फ गृहस्थी का सामान ही नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक जीवन का उपहार दे रहा है।
यह आयोजन गवाह है इस बात का कि जब समाज का हाथ सेवा के लिए बढ़ता है, तो किस्मत की लकीरें खुद-ब-खुद बदल जाती हैं। आज 51 आंगन महकेंगे, 51 माओं की दुआएं कबूल होंगी और 51 नए संसार बसेंगे।
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