
बड़ी कामयाबी : उदयपुर साइबर थाना पुलिस ने रतलाम (मैसेज में ‘रतलाम जिला’) के आरोपी को दबोचा; ठगी की रकम खपाने के लिए दिया था बैंक खाता।
उदयपुर कनेक्शन : सवीना के गोकुल विलेज निवासी भाजपा शहर महामंत्री देवीलाल सालवी हुए थे इस बड़े डिजिटल फ्रॉड के शिकार।
क्या है म्यूल अकाउंट : जानिए कैसे दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर पलक झपकते ही गायब हो जाती है ठगी की रकम।
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में करीब एक साल पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ स्थानीय नेता से हुई ₹1.30 करोड़ की सनसनीखेज साइबर ठगी के मामले में उदयपुर साइबर थाना पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) के एक शातिर सप्लायर को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सेमलीया निवासी दीपेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जिसने चंद रुपयों के कमीशन के लालच में अपना पूरा बैंक खाता साइबर ठगों के हवाले कर दिया था।
बेंगलुरु से आया था ‘बिजनेस’ का झांसा; ऐसे जाल में फंसे भाजपा नेता
उदयपुर साइबर थाना पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला जून 2025 का है, जब सविना के गोकुल विलेज में रहने वाले उदयपुर भाजपा शहर महामंत्री देवीलाल साल्वी के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था।
हेल्थ एंड फिटनेस का झांसा: फोन करने वाले ने खुद को बेंगलुरु के क्रॉस रोड से संचालित होने वाले ‘हेल्थ एंड फिटनेस इक्विपमेंट’ (जिम और फिटनेस उपकरण) बिजनेस से जुड़ा हुआ बताया। उसने साल्वी को उदयपुर में इस फ्रेंचाइजी या बिजनेस को शुरू कर हर महीने लाखों रुपये कमाने का लालच दिया।
किश्तों में ऐंठे करोड़ों रुपये: ठगों के झांसे में आकर साल्वी ने 6 जुलाई से 25 जुलाई के बीच ही अलग-अलग बैंक खातों में ₹54.50 लाख ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी आरोपी अलग-अलग बहानों से पैसे मांगते रहे। जब तक उन्हें ठगी का अहसास हुआ, वे कुल ₹1.30 करोड़ गंवा चुके थे।
सितंबर में दर्ज हुआ था केस: पीड़ित ने 28 सितंबर 2025 को नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। हैरानी की बात यह है कि पुलिस में शिकायत होने के बाद भी ठग उनके ऊपर और पैसे भेजने का दबाव बनाते रहे और फिर अचानक अपने फोन बंद कर गायब हो गए।
जांच में खुली कड़ियां: 33 डिग्री… (नहीं, यहाँ सुराग बैंक ट्रांजैक्शन था)
साइबर थाना पुलिस के एसएचओ और पुलिस उपाधीक्षक (DySP) विनय चौधरी के नेतृत्व में टीम ने जब दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों के ट्रांजैक्शन खंगाले, तो कड़ियां सीधे मध्य प्रदेश के रतलाम से जुड़ीं। पुलिस ने जाल बिछाकर दीपेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि दीपेंद्र ने एक बैंक में खाता खुलवाया था और सिर्फ थोड़े से कमीशन के बदले अपनी पूरी ‘बैंकिंग किट’—जिसमें एटीएम (ATM) कार्ड, चेक बुक, नेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड शामिल थे—साइबर अपराधियों के हवाले कर दी थी। भाजपा नेता से ठगी गई रकम में से ₹7,79,871 सीधे दीपेंद्र के इसी खाते में आए थे, जिसे पुलिस ने अब फ्रीज (सीज) करवा दिया है।
इनसाइड स्टोरी: क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’ और क्यों यह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है?
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘म्यूल अकाउंट’ (जिसे मनी म्यूल भी कहा जाता है) आज के समय में साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा वित्तीय हथियार बन चुका है:
वित्तीय पुल (Financial Bridge): यह खाता पीड़ित और ठगी के मुख्य मास्टरमाइंड के बीच एक पुल का काम करता है। ठग सीधे अपने बैंक खातों में पैसे नहीं मंगाते, बल्कि दीपेंद्र जैसे गरीब या लालची लोगों को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते हैं।
ट्रैक करना नामुमकिन बनाना: जैसे ही ठगी की रकम इस ‘म्यूल अकाउंट’ में आती है, वैसे ही इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इस पैसे को पलक झपकते ही देश-विदेश के 10-15 अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है या तुरंत एटीएम से निकाल लिया जाता है। इससे जांच एजेंसियों के लिए मुख्य अपराधियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
हर बड़े फ्रॉड में इस्तेमाल: इन खातों का इस्तेमाल केवल इन्वेस्टमेंट फ्रॉड में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन ट्रेडिंग, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम और आजकल चल रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में धड़ल्ले से हो रहा है।
उदयपुर पुलिस की अगली कार्रवाई:
उदयपुर साइबर थाना पुलिस का मानना है कि ‘म्यूल अकाउंट’ के नेटवर्क को तोड़ना किसी भी बड़े साइबर सिंडिकेट की कमर तोड़ने जैसा है। फिलहाल पुलिस दीपेंद्र से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय किन-किन साइबर अपराधियों को यह बैंक खाते बेचे थे और इस गिरोह के मुख्य सरगना कहाँ छिपे हैं।
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