
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन की ओर कदम बढ़ाते हुए भारत के मत्स्यपालन क्षेत्र ने अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य पदार्थ निर्यात 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।
भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात में फ्रोजन झींगा का दबदबा बरकरार है। कुल निर्यात आय में अकेले झींगे का योगदान दो-तिहाई से अधिक यानी 47,973.13 करोड़ रुपये रहा। मात्रा के हिसाब से इसमें 4.6% और मूल्य के हिसाब से 6.35% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक बाजार का बदला समीकरण : चीन और यूरोपीय संघ में भारी उछाल
मत्स्यपालन मंत्रालय द्वारा बाजार विविधीकरण (Market Diversification) के प्रयासों का असर स्पष्ट दिख रहा है:
चीन: भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना। चीन को होने वाले निर्यात मूल्य में 22.7% की भारी बढ़ोतरी हुई।
यूरोपीय संघ (EU): यहाँ भारतीय उत्पादों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया, जहाँ निर्यात मूल्य 37.9% बढ़ा।
अमेरिका: 2.32 अरब डॉलर के साथ अमेरिका शीर्ष आयातक तो बना रहा, लेकिन आपसी टैरिफ चुनौतियों के कारण वहां के शिपमेंट मूल्य में 14.5% की गिरावट आई।
दक्षिण-पूर्व एशिया: यहाँ भी मूल्य में 36.1% का प्रभावशाली विस्तार दर्ज किया गया।
निर्यात की मजबूती के पीछे सरकार की रणनीति
केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में विभाग ने कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं:
बाजार विस्तार : यूरोपीय संघ, रूस और चीन सहित प्रमुख बाजारों में 211 नए निर्यात प्रतिष्ठानों को मंजूरी दी गई।
निवेशक सम्मेलन : अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल और अलंकारिक मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा दिया गया।
नियामक ढांचा : 2025 में ‘राष्ट्रीय ट्रेसेबिलिटी फ्रेमवर्क’ और ईईजेड नियमों की अधिसूचना से अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया।
लॉजिस्टिक्स : विशाखापट्टनम, जेएनपीटी (मुंबई), कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई बंदरगाहों ने कुल निर्यात में 64% की भागीदारी निभाकर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखा।
प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार मछली पालकों के जीवन स्तर में सुधार और एक जीवंत मत्स्यपालन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में काम करना जारी रखेगी। फ्रोजन मछली, स्क्विड और मछली के तेल (Fish Oil) जैसे उत्पादों में आई सकारात्मक तेजी यह संकेत देती है कि भारत वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में एक ‘सुपरपावर’ बनने की राह पर है।
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