राज-ममता कार्यक्रम : मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मॉडल स्टेट बनेगा राजस्थान, जयपुर में स्थापित होगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने प्रदेशवासियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन के तहत राज्य के बजट 2026-27 में घोषित ‘राज-ममता’ (राजस्थान मेंटल अवेयरनेस, मॉनिटरिंग एंड ट्रीटमेंट फोर ऑल) कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए प्रदेश की राजधानी जयपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हैल्थ’ की स्थापना की जा रही है। यह केंद्र अत्याधुनिक काउंसलिंग और टेली-मेडिसिन सुविधाओं से लैस होगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ से विशेषज्ञ दूर-दराज के क्षेत्रों में बैठे मरीजों को भी डिजिटल माध्यम से परामर्श दे सकेंगे।

अब प्रदेशवासियों को मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी होगी। सरकार ने प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल्स’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन सेल्स के माध्यम से जिला स्तर पर ही विशेषज्ञ परामर्श, पुनर्वास और उपचार की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

तनाव और अवसाद से जूझ रहे लोगों के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित ‘टेली-मानस’ कार्यक्रम राजस्थान में वरदान साबित हो रहा है।

परामर्श का आंकड़ा: 15 अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 71 हजार से अधिक लोग टोल-फ्री नंबर (14416) के जरिए मदद ले चुके हैं।

प्रमुख केंद्र: जयपुर और जोधपुर में यह सेवा 2023 से निरंतर सफलता के साथ संचालित की जा रही है।

‘राज-ममता’ कार्यक्रम के तहत युवाओं में बढ़ते तनाव और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, आशा सहयोगिनियों और स्वास्थ्य मित्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में शुरुआती स्तर पर ही मानसिक रोगों के लक्षणों की पहचान कर सकें।

प्रमुख हेल्पलाइन नंबर :

टेली-मानस टोल फ्री: 14416 / 1800-891-4416 (24×7 उपलब्ध)

 

राजस्थान सरकार की इस पहल का उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और हर नागरिक तक किफायती उपचार पहुंचाना है।

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