
मुंबई।
गुजरात के वलसाड स्टेशन से आई एक खबर ने रेलवे के ट्रैक से लेकर पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों तक को हिला दिया। 19 वर्षीय लड़की का शव, खून से सना हुआ, रेलवे प्लेटफॉर्म पर पाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने यह गहरे संकेत दिए कि हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था। यह तो सिर्फ शुरुआत थी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस ने घटनास्थल से मिले खून के धब्बे, सीसीटीवी फुटेज और एक खौफनाक पैटर्न को जोड़ते हुए इस भयावह अपराध की गुत्थी को सुलझाना शुरू किया। और फिर सामने आया हरियाणा का वो नाम जिसे जानकर हर कोई कांप उठा—राहुल जाट।
कातिल का चेहरा
राहुल जाट, एक विकलांग युवक, जिसका बाएं पैर में जरा भी ताकत नहीं थी, और जिसे पढ़ाई में कभी भी रुचि नहीं रही। चौथी कक्षा में फेल होने के बाद उसने स्कूल छोड़ दिया और खुद को अपराध की दुनिया में ढाल लिया। घरवाले, जो उसकी आपराधिक प्रवृत्तियों से तंग आ चुके थे, उसे त्याग चुके थे। लेकिन राहुल ने अपनी गंदगी से परिवार का नाम मिट्टी में मिला दिया।
वह हर बार अपने शिकार को बेहद चालाकी से चुनता—अकेली महिलाएं, विकलांग यात्री, और वरिष्ठ नागरिक। उनका लूटपाट, बलात्कार और हत्या करने का पैटर्न, यह सब राहुल के दिमाग की खौफनाक गुत्थी को दिखाता था। फिर अगले ही पल, जैसे ही ट्रेन आती, वह अपनी पहचान बदलकर अगली स्टेशन पर गायब हो जाता।
पहला शिकार: उदवाड़ा स्टेशन (14 नवंबर)
राहुल ने अपनी पहली मर्सीलेस हरकत 14 नवंबर को की। उदवाड़ा स्टेशन पर एक 19 वर्षीय लड़की को अपना शिकार बना लिया। उसने उस लड़की के साथ बलात्कार किया और फिर बेरहमी से उसे मार डाला। इसके बाद, किसी घबराए हुए अपराधी की तरह उसने अपने कपड़े बदलें और वडोदरा की ओर भाग निकला।
दूसरा शिकार: कटिहार एक्सप्रेस (19 नवंबर)
5 दिन बाद, 19 नवंबर को कटिहार एक्सप्रेस में उसने एक और निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाया। इस बार उसका शिकार 60 वर्षीय एक विकलांग यात्री थे। राहुल ने चाकू से हमला किया, लूटपाट की, और फिर मुंबई लौट आया।
तीसरा शिकार: तिरुपति से सिकंदराबाद (24 नवंबर)
24 नवंबर को उसने तिरुपति और सिकंदराबाद के बीच यात्रा करते हुए एक विकलांग महिला को अपना शिकार बना लिया। यह कातिल का पैटर्न दिन-ब-दिन खौफनाक होता जा रहा था।
पुराने गुनाह
जांचकर्ताओं का मानना था कि राहुल ने अक्टूबर महीने में पुणे और मुंबई के बीच भी एक महिला की हत्या की थी, हालांकि उस मामले में सुराग ढूंढने में काफी वक्त लग गया था।
मुंबई में छिपने का अड्डा
मुंबई के दादर और बांद्रा स्टेशन, अब राहुल के लिए शरण स्थल बन गए थे। वहां का भीड़-भाड़ भरा माहौल उसे एकदम सुरक्षित महसूस कराता था। पुलिस ने इन स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज का गहन अध्ययन किया, और राहुल के हर कदम को ट्रैक करने की कोशिश की। यह फुटेज, पुलिस के लिए रहस्य को सुलझाने की चाबी साबित हुए।
गिरफ्तारी की कहानी
वलसाड क्राइम ब्रांच ने इस नृशंस कातिल को पकड़ने के लिए मुंबई, राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की पुलिस के साथ मिलकर 100 से ज्यादा अधिकारियों की एक टीम बनाई। अंत में, रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद, राहुल को वापी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से चोरी किए गए मोबाइल फोन और अन्य सामान भी बरामद हुए।
आरोपों का बोझ
राहुल पर बलात्कार, हत्या, लूटपाट, और चोरी के गंभीर आरोप हैं। वलसाड क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने कहा, “मुंबई उसके लिए सबसे सुरक्षित जगह थी। दादर और बांद्रा स्टेशन पर उसने काफी समय बिताया और उन जगहों को अपने अपराधों का अड्डा बना लिया।”
अंतिम पर्दाफाश
मुंबई सेंट्रल जीआरपी के वरिष्ठ निरीक्षक एच टी कुंभारे ने बताया, “सीसीटीवी फुटेज ने उसके अपराधों का राज खोल दिया। वह अपने लिए मौत और गुनाह का जाल बुन चुका था, और हर कदम पर यह जाल और भी मजबूत होता जा रहा था।”
राहुल जाट की कहानी एक रहस्य और भय से भरे अपराधी के तौर पर सामने आई, जिसने रेलवे प्लेटफॉर्म्स को खौफ का अड्डा बना दिया। उसकी गिरफ्तारियों और अपराधों ने यह साबित कर दिया कि जब कातिल की चुप्पी टूटती है, तो उसका चेहरा और उसकी हरकतें सिर्फ मौत और नफरत की गवाही देती हैं।
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