
न्यू जर्सी। यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने एक कड़े और संघर्षपूर्ण फाइनल मुकाबले में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय (Extra Time) में 1-0 से हराकर दूसरी बार पुरुष फुटबॉल विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए इस खिताबी मुकाबले का एकमात्र और निर्णायक गोल 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने दागा।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही स्पेन एक ही समय में पुरुष और महिला दोनों फुटबॉल विश्व कप ट्रॉफी अपने पास रखने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
मैदान के बाहर का नजारा और ऐतिहासिक हाफ-टाइम शो
फाइनल मुकाबले को लेकर दर्शकों और वीआईपी हस्तियों में भारी उत्साह देखा गया। मैच शुरू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हेलीकॉप्टरों के बेड़े के साथ न्यू जर्सी पहुंचे। इसके अलावा, वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार आयोजित हुए भव्य हाफ-टाइम शो में शकीरा, मैडोना और जस्टिन बीबर जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं, जिसके कारण मध्यांतर (हाफ-टाइम) सामान्य 15 मिनट के बजाय 27 मिनट का रहा।
उतार-चढ़ाव से भरा रहा मुकाबला
पूरे मैच के दौरान स्पेन ने आक्रामक खेल दिखाते हुए गोल करने के कई शानदार मौके बनाए, जबकि अर्जेंटीना की टीम रक्षात्मक (डिफेंसिव) मोड में नजर आई। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं। अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो ‘डीबू’ मार्टिनेज़ ने लामिन यमाल और मिकेल ओयारज़ाबाल के खतरनाक शॉट्स का बेहतरीन बचाव करते हुए अपनी टीम को मैच में बनाए रखा और मुकाबले को अतिरिक्त समय तक खींच ले गए।
मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट दूसरे हाफ के इंजरी टाइम (93वें मिनट) में आया, जब अर्जेंटीना के खिलाड़ी एंज़ो फर्नांदेज़ को दूसरा पीला कार्ड (रेड कार्ड) दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया, जिसके बाद अर्जेंटीना को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने पर मजबूर होना पड़ा। आखिरकार 106वें मिनट में निको विलियम्स के हेडर पास को कंट्रोल करते हुए फेरान टोरेस ने गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया।
अर्जेंटीना की हार की 5 अहम वजहें
खेल विश्लेषकों के अनुसार, इस महामुकाबले में अर्जेंटीना के खिताब गंवाने के पीछे निम्नलिखित पांच प्रमुख कारण रहे:
लियोनेल मेसी पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता: स्पेनिश डिफेंस ने पूरी रणनीति के साथ अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को खामोश रखा। पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल और 4 असिस्ट करने वाले मेसी इस मैच में केवल एक शॉट लगा सके, जो टारगेट पर नहीं था। मेसी की पासिंग भी इस मैच में अपनी स्वाभाविक लय में नहीं दिखी।
अत्यधिक रक्षात्मक रणनीति (डिफेंसिव मोड): अर्जेंटीना ने अपने आक्रामक खेल पर भरोसा करने के बजाय स्पेन के खेल को बाधित करने और उन्हें निराश करने की रणनीति अपनाई। हालांकि, खेल के अंतिम क्षणों में जूलियानो सिमोने की अगुवाई में दो खतरनाक हमले हुए, लेकिन वे गोल में तब्दील नहीं हो सके।
स्पेन के मिडफील्ड का दबदबा: स्पेन के मिडफील्डर्स ने मैच की रफ्तार को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा। उन्होंने अपनी तेज पासिंग और गेंद छीनने (बॉल रिकवरी) की क्षमता के दम पर अर्जेंटीना को मैदान पर ज्यादा समय तक गेंद को होल्ड करने का मौका नहीं दिया।
महत्वपूर्ण मोड़ पर एक खिलाड़ी की कमी: एंज़ो फर्नांदेज़ को रेड कार्ड मिलने के बाद 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही अर्जेंटीना के लिए स्पेन जैसी मजबूत टीम को रोकना नामुमकिन हो गया। इसके अलावा, पहले हाफ में लिसांद्रो मार्टिनेज़ के चोटिल होकर बाहर होने से भी टीम का रक्षात्मक संतुलन बिगड़ गया।
स्पेन का शानदार सामूहिक खेल (टीम वर्क): स्पेन के पास भले ही कोई एक बड़ा सुपरस्टार न हो, लेकिन पूरी टीम ने एक मशीन की तरह सामूहिक रूप से प्रदर्शन किया। कोच लुइस दे ला फुएंते के मार्गदर्शन में ओयारज़ाबाल, रोड्री, पेड्री और बेंच से आए मिकेल मेरिनो जैसे खिलाड़ियों ने एकजुट होकर स्पेन को विश्व फुटबॉल के शिखर पर पहुंचा दिया।
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