हरियाणा में खट्टर और उदयपुर में 3-3 चुनाव हारने वाले कांग्रेसी परिवारों का राज खत्म, पूर्व कलेक्टर ताराचंद मीना उदयपुर लोकसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी

अगर जीते तो विधायक के साथ एमपी भी ताराचंद होंगे

उदयपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की जारी दूसरी सूची में पार्टी ने आईएएस ताराचंद मीणा को पार्टी प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही उदयपुर में पूर्व सांसद रघुवीर मीणा और कटारा परिवार के राज का अंत हो गया। कांग्रेस का यह फैसला बीजेपी के हरियाणा में खट्टर राज को खत्म करने जैसा है।

बहरहाल ताराचंद मीना ने जिस प्रकार से उदयपुर में कलेक्टर पद को संभालते ही मिशन कोटड़ा और आदिवासी क्षेत्रों में कार्य करवाने शुरू किए थे, तभी यह चर्चा शुरू हो गई थी कि ताराचंद मीना यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। और काग्रेस से ही लड़ने की चर्चा थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन अब सही निर्णय कर लिया।

यही नहीं अंदर की बात यह है कि ताराचंद मीना के कामकाज को देखते हुए बीजेपी में उनके नाम को आगे बढ़ाया गया था, लेकिन यह बात आगे बढ़ नहीं सकी।

यह पहला मौका है, जब उदयपुर लोकसभा चुनाव में दो जनजाति अधिकारियों के बीच मुकाबला है। ताराचंद मीना के मैदान में आने से इस बार मुकाबला एक तरफा नहीं रहा है। मुकाबला पूरी तरह से रोचक होने वाला है।

आपको बता दें कि उदयपुर कलेक्टर रहते हुए मीणा ने मिशन कोटड़ा के जरिए आदिवासियों में गहरी पैठ बनाई और अपने नाम प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड जीतकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेताओं में अपनी पैठ बना ली थी।

आईएएस ताराचंद मीणा ने जनवरी 2022 में जब उदयपुर जिला कलेक्टर का पदभार ग्रहण किया तो सबसे अधिक ध्यान जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र कोटड़ा के सर्वांगीण विकास का रहा। मिशन कोटड़ा अभियान चलाकर आदिवासियों से पहचान बनाई। उनकी मंशा झाड़ोल विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने की थी और उन्होंने इसके लिए प्रयास भी किए लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद आईएएस मीणा ने अपना सारा ध्यान लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगा दिया।

कांग्रेस प्रत्याशी बनने के बाद ताराचंद मीणा का कहना है कि आईएएस रहते हुए उनका मकसद आदिवासियों का विकास था और राजनीति क्षेत्र में सफलता मिली तो यही रहेगा। उनका कहना है कि उन्होंने उदयपुर जिले के ही नहीं, बल्कि संभाग के सभी आदिवासियों के भले के लिए काम किया। मीणा कहते हैं आज भी उदयपुर जिले के दूरस्थ इलाकों में विकास की सबसे ज्यादा जरूरत है।

उनका मानना ही कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति के सुधार के लिए जितना काम होना चाहिए थे, उतना नहीं हो पाया। आदिवासी क्षेत्र में अभी भी शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल, रोजगार, स्वरोजगार प्रशिक्षण, परिवहन, कृषि व वन उत्पादों का विपणन, सिंचाई इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाने की जरूरत है। हालांकि यह देखना होगा कि प्रशासनिक खेमें में प्रभावशाली छवि रखने वाले ताराचंद मीणा राजस्थान के सियासी डगर में कितने कारगर साबित हो पाएंगे।

जीते तो एमएलए भी ताराचंद और एमपी भी ताराचंद होंगे

यह इत्तेफाक है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी से ताराचंद जैन प्रत्याशी थे जो जीतकर विधायक बने, अब लोकसभा में कांग्रेस ने ताराचंद मीना को टिकट दिया है। अगर मीना जीते तो उदयपुर के विधायक के साथ एमपी भी ताराचंद होंगे।

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