मिडिल ईस्ट महायुद्ध कहां तक पहुंचा…आगे क्या होने वाला है यहां पढ़िए

 

‘जीत’ के दावों के बीच ट्रंप के बदले सुर, क्या बेनतीजा खत्म होगा ईरान के खिलाफ संघर्ष?

वॉशिंगटन/तेहरान। 11 मार्च।

 

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां मिसाइलों की गूंज से ज्यादा रणनीतिक कूटनीति और ‘एग्जिट रूट’ की तलाश हावी होने लगी है। बुधवार सुबह तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट के पास हुए सिलसिलेवार धमाकों और रिहायशी इलाकों में मची तबाही के बीच व्हाइट हाउस से अब युद्ध को जल्द खत्म करने के संकेत मिलने लगे हैं।

ईरान पर चौतरफा हमला और जवाबी कार्रवाई

तेहरान के रिसालत स्क्वायर के पास हुए हमलों में ‘रेड क्रीसेंट’ ने कम से कम 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों की दो बड़ी लहरों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इसके उलट, ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों को दहला दिया है:

सऊदी अरब और कुवैत: सऊदी रक्षा मंत्रालय ने शयबाह ऑयलफील्ड की ओर बढ़ रहे 5 ड्रोनों को मार गिराया, जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में 8 ईरानी ड्रोन नष्ट किए।

इराक: इराक में सक्रिय प्रो-ईरानी गुटों ने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी ठिकानों पर 31 हमले करने का दावा किया है।

बहरीन: यहाँ हवाई हमले के सायरन बजने के बाद नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

 

होर्मुज की घेराबंदी: दुनिया की ‘दुखती रग’ पर ईरान का हाथ

ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘सिरदर्द’ बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UNCTAD) की रिपोर्ट के अनुसार:

दुनिया का 38 प्रतिशत कच्चा तेल और 29 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

इस मार्ग के बाधित होने से भारत (राजस्थान) सहित एशियाई देशों में ईंधन और उर्वरक की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

अमेरिकी नौसेना ने यहाँ ईरान के 16 माइन-लेयर जहाजों को नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।

 

ट्रंप प्रशासन के बदलते तेवर: ‘जीत’ का मुखौटा या रणनीतिक विफलता?

युद्ध की शुरुआत में आक्रामक रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इसे ‘जल्द खत्म करने’ की बात कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजराइल को कोई ठोस रणनीतिक बढ़त हासिल नहीं हुई है।

रणनीतिक विफलता: 5000 से अधिक ठिकानों पर हमलों के बावजूद ईरान को घुटनों पर नहीं लाया जा सका।

सम्मानजनक विदाई: ट्रंप अब किसी तरह इस युद्ध को खत्म करने का रास्ता (Exit Route) निकाल रहे हैं, ताकि घरेलू महंगाई और वैश्विक दबाव से बचा जा सके।

 

बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम: उत्तर कोरिया का प्रवेश

इस युद्ध के बीच ईरान में बड़े सत्ता परिवर्तन के संकेत मिले हैं। उत्तर कोरिया ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई (आयतुल्लाह खामेनेई के पुत्र) के चयन का समर्थन किया है और अमेरिका-इजराइल के हमलों को “अवैध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।

 

प्रोपेगेंडा और हकीकत

जहां अमेरिका इसे अपनी ‘बड़ी जीत’ के रूप में पेश कर रहा है, वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे ‘सरासर झूठ’ करार देते हुए कहा है कि यह युद्ध केवल साधारण अमेरिकियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। युद्ध के जानकारों का मानना है कि महीनों की गोलाबारी और अरबों डॉलर स्वाहा करने के बाद भी शक्ति संतुलन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

 

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