
ट्रंप का यू-टर्न : युद्ध की कगार से लौटा विश्व, ईरान-अमेरिका दो हफ्ते के सीज फायर पर राजी, तेल की कीमतें गिरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा
वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद।
मध्य पूर्व के युद्ध के मैदान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। यह खुलासा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी अंतिम सैन्य धमकी के समय (Deadline) से मात्र 90 मिनट पहले अपने हमले के फैसले को वापस ले लिया। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमत हो गए हैं।
ट्रंप का चौंकाने वाला फैसला : वो 90 मिनट
व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर एक निर्णायक और अत्यंत विनाशकारी हमले का आदेश देने वाले थे। ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत हमले की समय-सीमा तय हो चुकी थी, लेकिन ‘डेडलाइन’ खत्म होने से ठीक 90 मिनट पहले ट्रंप ने हमलों को निलंबित करने की घोषणा की। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने पर तुरंत राजी होता है, तो अमेरिका पीछे हटने को तैयार है। तेहरान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिससे एक बड़े वैश्विक विनाश को टाल दिया गया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और इस्लामाबाद का मंच
इस ऐतिहासिक शांति पहल के पीछे पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों देशों को युद्धविराम के लिए राजी किया। समझौते के अनुसार, अब आगामी शुक्रवार से इस्लामाबाद में औपचारिक शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। पाकिस्तान इस वार्ता का मेजबान होगा, जहां मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं।
तेल बाजार में ऐतिहासिक गिरावट : 16% टूटे दाम
जैसे ही ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के खुलने की खबर आई, वैश्विक तेल बाजार में मानो भूकंप आ गया।

US Crude : 16% गिरकर $94.59 प्रति बैरल पर आ गया।
Brent Crude : 15% की गिरावट के साथ $92.35 पर बंद हुआ।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के इस फैसले ने न केवल युद्ध रोका, बल्कि वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) को भी एक बड़े झटके से बचा लिया।
इजराइल की असहमति : “लेबनान पर हमले जारी रहेंगे”

इस युद्धविराम के बीच इजराइल का रुख सबसे अलग है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने साफ कर दिया है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता। इजराइल ने दक्षिण लेबनान में बमबारी जारी रखी है और चेतावनी दी है कि वे ईरान को इस समय का उपयोग परमाणु या मिसाइल ताकत बढ़ाने के लिए नहीं करने देंगे। इजराइली नेतृत्व ट्रंप के इस अचानक लिए गए फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है।
ईरान का दावा: “अमेरिकी दबाव विफल”
तेहरान में इस समझौते को ‘ईरानी प्रतिरोध’ की जीत के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी नेताओं का कहना है कि ट्रंप को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि युद्ध अमेरिका के लिए एक बड़ी आपदा साबित हो रहा था। अब ईरान इस्लामाबाद वार्ता में अपनी शर्तों पर शांति की नींव रखना चाहता है।
क्या ट्रंप का यह ’90 मिनट’ वाला फैसला दुनिया को स्थायी शांति की ओर ले जाएगा या यह केवल एक बड़ा तूफान आने से पहले की शांति है? इसका फैसला अब इस्लामाबाद की बातचीत से होगा।
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