
इंडिया ब्लॉक का आंतरिक संघर्ष, कांग्रेस की रणनीति बनी ‘आप’ की हार का कारण
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में इंडिया ब्लॉक के घटक दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की आपसी खींचतान ने भाजपा को अप्रत्याशित लाभ दिला दिया। कांग्रेस ने भले ही तीसरी बार विधानसभा में खाता न खोला हो, लेकिन 14 सीटों पर उसने ‘आप’ को पराजित कर भाजपा का रास्ता साफ कर दिया। इन 14 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने ‘आप’ के दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ते हुए उनकी हार सुनिश्चित की।
संदीप दीक्षित: 12 साल पुराना बदला पूरा
नई दिल्ली सीट पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हार कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के लिए व्यक्तिगत संतोष का क्षण साबित हुई। भाजपा के प्रवेश वर्मा से 4089 वोटों से हारने वाले केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा झटका तब आया जब संदीप दीक्षित ने 4568 वोट हासिल कर उन्हें तीसरे स्थान पर धकेल दिया। संदीप ने अपनी मां, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की 12 साल पहले हुई हार का बदला पूरा करते हुए इस हार को ‘पॉलिटिकल पर्सनल’ बना दिया।
‘आप’ की रणनीतिक चूक
‘आप’ ने इस चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर बड़ी गलती की। भाजपा से मिलीभगत के आरोपों के बावजूद कांग्रेस ने अंतिम चरण में जोरदार प्रचार किया, जिससे उसका वोट शेयर 2% तक बढ़ गया। हालांकि, इससे कांग्रेस की सीटें नहीं बढ़ीं, लेकिन इसने ‘आप’ की जीत की संभावना पर भारी असर डाला।
महत्वपूर्ण सीटों पर हार की वजह
- जंगपुरा: मनीष सिसोदिया को भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह ने 675 वोटों से हराया। कांग्रेस के फरहाद सूरी ने 7350 वोट लेकर ‘आप’ की हार सुनिश्चित की।
- ग्रेटर कैलाश: सौरभ भारद्वाज को भाजपा की शिखा रॉय ने 3188 वोटों से हराया, जबकि कांग्रेस के गर्वित सिंघवी ने 6711 वोट बटोरे।
- मालवीय नगर: सोमनाथ भारती को भाजपा के सतीश उपाध्याय ने 2131 वोटों से हराया। कांग्रेस के जितेंद्र कोचर ने 6770 वोट हासिल किए।
- बादली: भाजपा के दीपक चौधरी ने ‘आप’ के अजेश यादव को 15,163 वोटों से हराया। कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने यहां 41 हजार से अधिक वोट प्राप्त किए।
कांग्रेस और ‘आप’ की टकराहट, भाजपा का सफर आसान
‘आप’ और कांग्रेस की आपसी खींचतान का लाभ भाजपा ने उठाया। आठ अन्य सीटों (राजेंद्र नगर, संगम विहार, तिमारपुर, महरौली, त्रिलोकपुरी, मादीपुर, महरौली और नांगलोई जाट) पर भी कांग्रेस ने ‘आप’ की हार में भूमिका निभाई।
नतीजों का संदेश
इस चुनाव ने इंडिया ब्लॉक के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस और ‘आप’ की आपसी अविश्वास ने भाजपा को अप्रत्याशित बढ़त दी, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकती है।
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