कड़ाके की ठंड में स्वास्थ्य सुरक्षा पर आयुष मंत्रालय की पहल

कड़ाके की ठंड के मौसम में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए सुझाव निवारक स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) की दिशा में एक अहम कदम माने जा सकते हैं। जब शीतलहर, कोहरा और गलन आम लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, ऐसे में खानपान और जीवनशैली से जुड़ी सरल सलाह जनस्वास्थ्य के लिए उपयोगी साबित होती है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें स्थानीय और मौसमी भोजन को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया गया है। बाजरा, ज्वार, मक्का, जौ और रागी जैसे मोटे अनाज न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि ठंड के मौसम में शरीर को आवश्यक ऊर्जा और गर्मी भी प्रदान करते हैं। यह संदेश आधुनिक प्रोसेस्ड फूड संस्कृति के विपरीत पारंपरिक भारतीय खानपान को दोबारा अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

आयुष मंत्रालय की सलाह आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित है, जहां भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का माध्यम माना जाता है। गुड़, घी और शहद जैसी चीजों को डाइट में शामिल करने की बात यह दर्शाती है कि प्राकृतिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थ आज भी मौसमी बीमारियों से बचाव में कारगर हैं।

इसके साथ ही ठंडी चीजों से बचने की चेतावनी यह संकेत देती है कि आधुनिक जीवनशैली की आदतें—जैसे सर्दियों में भी कोल्ड ड्रिंक्स या फ्रिज का ठंडा पानी—स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। यह सलाह विशेष रूप से शहरी जीवनशैली अपनाने वाले लोगों के लिए प्रासंगिक है।

समग्र रूप से देखें तो आयुष मंत्रालय के ये सुझाव केवल सर्दियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सालभर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सोच को बढ़ावा देते हैं। साथ ही, स्थानीय और मौसमी भोजन पर ज़ोर देकर यह पहल स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन और सतत जीवनशैली के संदेश को भी मजबूत करती है।

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