
नई दिल्ली। इंडियन आइडल सीजन-3 के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग के मात्र 43 वर्ष की उम्र में स्ट्रोक से निधन की खबर ने एक बार फिर इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के मामलों में समय पर पहचान और तुरंत इलाज ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने लोगों को ‘FAST’ फॉर्मूले के जरिए जागरूक रहने की सलाह दी है।
स्ट्रोक को ब्रेन अटैक भी कहा जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है। चिकित्सकीय रूप से इसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं—इस्केमिक स्ट्रोक, जो खून का थक्का बनने से होता है, और हेमोरेजिक स्ट्रोक, जिसमें रक्त वाहिका फट जाती है। इसके अलावा मिनी स्ट्रोक या टीआईए (ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक) भी होता है, जो कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन भविष्य में बड़े स्ट्रोक की चेतावनी माना जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए ‘FAST’ फॉर्मूला बेहद सरल और प्रभावी है। इसमें
F (Face)—चेहरे पर ध्यान दें, क्या मुस्कुराने पर चेहरा एक ओर झुक रहा है।
A (Arms)—दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें, क्या एक हाथ कमजोर पड़ रहा है या नीचे गिर रहा है।
S (Speech)—बोलने में लड़खड़ाहट, अस्पष्टता या अजीबपन महसूस हो रहा है।
T (Time)—इनमें से कोई भी लक्षण दिखते ही बिना देरी किए मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट कीमती होता है, इसलिए समय पर उपचार से जान के साथ-साथ स्थायी विकलांगता का खतरा भी कम किया जा सकता है।
आयुर्वेद में स्ट्रोक को मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से जुड़ा न्यूरोलॉजिकल रोग माना गया है। आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, वात को संतुलित रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना, समय पर सोना-जागना, संतुलित और ताजा भोजन करना आवश्यक है। दालें, सब्जियां, सूप और घी जैसे पौष्टिक आहार को शामिल करने तथा ठंडे, बासी और अत्यधिक तले-भुने भोजन से परहेज की सलाह दी जाती है।
इसके साथ ही नियमित हल्का व्यायाम, योग, तिल के तेल से मालिश, ध्यान और प्राणायाम को जीवनशैली में शामिल करने से रक्त संचार बेहतर रहता है और तनाव कम होता है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और शराब का सेवन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है, इसलिए इन्हें नियंत्रित या पूरी तरह त्यागना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही स्ट्रोक से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है। ‘FAST’ फॉर्मूला को याद रखकर आम लोग भी किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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